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mahabharat 13.93.10-11: तत्पश्चात, तपस्वी ने श्राद्ध के लिए शास्त्रों में वर्णित सभी फल, मूल और अन्य खाद्य पदार्थ एकत्र किए तथा वे भी जो उसके पुत्र को पसंद थे।   |   mahabharat अध्याय 13.93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 93: शोकातुर निमिका पुत्रके निमित्त पिण्डदान तथा श्राद्धके विषयमें निमिको महर्षि अत्रिका उपदेश, विश्वेदेवोंके नाम एवं श्राद्धमें त्याज्य वस्तुओंका वर्णन  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  13.93.10-11 
यानि तस्यैव भोज्यानि मूलानि च फलानि च॥ १०॥
उक्तानि यानि चान्नानि यानि चेष्टानि तस्य ह।
तानि सर्वाणि मनसा विनिश्चित्य तपोधन:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात, तपस्वी ने श्राद्ध के लिए शास्त्रों में वर्णित सभी फल, मूल और अन्य खाद्य पदार्थ एकत्र किए तथा वे भी जो उसके पुत्र को पसंद थे।
 
Thereafter, the ascetic collected all the fruits, roots and other edible items mentioned in the scriptures for Shraddha and those that were liked by his son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)