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mahabharat 13.92.49: युधिष्ठिर! जो ऋषियों द्वारा बताए गए धर्म के मार्ग पर सदैव चलते हैं, जिनकी बुद्धि एक ही निश्चय पर पहुँच गई है और जो सब धर्मों को जानते हैं, उन्हें देवता ब्राह्मण मानते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  13.92.49 
ऋषीणां समये नित्यं ये चरन्ति युधिष्ठिर।
निश्चिता: सर्वधर्मज्ञास्तान् देवा ब्राह्मणान् विदु:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जो ऋषियों द्वारा बताए गए धर्म के मार्ग पर सदैव चलते हैं, जिनकी बुद्धि एक ही निश्चय पर पहुँच गई है और जो सब धर्मों को जानते हैं, उन्हें देवता ब्राह्मण मानते हैं।
 
Yudhishthira! Those who always follow the path of righteousness prescribed by sages, whose intellect has arrived at a single decision and who know all the religions, are considered by the gods as Brahmins. 49.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)