श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  13.92.41-42h 
यस्य मित्रप्रधानानि श्राद्धानि च हवींषि च॥ ४१॥
न प्रीणन्ति पितॄन् देवान् स्वर्गं च न स गच्छति।
 
 
अनुवाद
जिसके श्राद्ध में अन्न-मित्र प्रधान होते हैं, उसके श्राद्ध और तर्पण से पितर और देवता तृप्त नहीं होते और श्राद्ध करने वाला मनुष्य स्वर्ग को नहीं जाता ॥41 1/2॥
 
The Shraddha and offerings of one in whose Shraddha food friends are the main part, do not satisfy the ancestors and gods and the person performing the Shraddha does not go to heaven. ॥ 41 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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