श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.92.3 
देवता: पूजयन्तीह दैवेनैवेह तेजसा।
उपेत्य तस्माद् देवेभ्य: सर्वेभ्यो दापयेन्नर:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इस लोक में देवता अपने दिव्य तेज से ब्राह्मणों की पूजा करते हैं; इसलिए देवताओं के निमित्त मनुष्य को चाहिए कि वह सभी ब्राह्मणों के पास जाकर उन्हें दान दे ॥3॥
 
The gods worship the brahmins in this world by their divine brilliance; therefore, for the sake of the gods one must go to all the brahmins and give them donations. ॥3॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas