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mahabharat 13.92.29: जो अथर्ववेद को जानते हैं, ब्रह्मचारी हैं, नियमित व्रतों का पालन करते हैं, सत्यवादी हैं, सदाचारी हैं और अपने कर्तव्यों का पालन करने में तत्पर रहते हैं, वे शुद्ध पुरुष हैं ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 13.92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.92.29 
अथर्वशिरसोऽध्येता ब्रह्मचारी यतव्रत:।
सत्यवादी धर्मशील: स्वकर्मनिरतश्च स:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो अथर्ववेद को जानते हैं, ब्रह्मचारी हैं, नियमित व्रतों का पालन करते हैं, सत्यवादी हैं, सदाचारी हैं और अपने कर्तव्यों का पालन करने में तत्पर रहते हैं, वे शुद्ध पुरुष हैं ॥29॥
 
Those who know the Atharvaveda, are celibate, observe fasts regularly, are truthful, virtuous and are prompt in performing their duties, are pure men. ॥29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)