Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.92.27: जो परम्परा से वेद या पराविद्या का ज्ञाता या उपदेशक है, जो वेदों की छान्दोग शाखा का विद्वान है, जो ज्येष्ठ सम्मन्त्र का गायक है, जो माता-पिता के वश में है और जो दस पीढ़ियों से श्रोता (वेदपाठी) है, वह भी वंश में शुद्ध है ॥27॥ | mahabharat अध्याय 13.92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो परम्परा से वेद या पराविद्या का ज्ञाता या उपदेशक है, जो वेदों की छान्दोग शाखा का विद्वान है, जो ज्येष्ठ सम्मन्त्र का गायक है, जो माता-पिता के वश में है और जो दस पीढ़ियों से श्रोता (वेदपाठी) है, वह भी वंश में शुद्ध है ॥27॥
The one who is a knower or preacher of Vedas or Paravidya by tradition, who is a scholar of Chandog branch of Vedas, who is the singer of Jyeshtha Sammantra, who is under the control of parents and who is a listener (Vedapathi) for ten generations, he is also pure in line. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥