Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.92.26: अब मैं पांकतेय ब्राह्मणों का वर्णन करूँगा। उन्हें ही पाण्टिकपुरे जानना चाहिए। जो तृणाचिकेत नामक मन्त्रों का जप करता है, गार्हपत्य आदि पाँच अग्नियों का भस्म करता है, त्रिसुपर्ण (त्रिसुपर्णमित्य आदि) नामक मन्त्रों का पाठ करता है और 'ब्रह्ममेतु माम्' आदि तैत्तिरीय-प्रसिद्ध विद्याओं के छह अंगों का ज्ञान रखता है, ये सभी शुद्ध हैं। 26॥ | mahabharat अध्याय 13.92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अब मैं पांकतेय ब्राह्मणों का वर्णन करूँगा। उन्हें ही पाण्टिकपुरे जानना चाहिए। जो तृणाचिकेत नामक मन्त्रों का जप करता है, गार्हपत्य आदि पाँच अग्नियों का भस्म करता है, त्रिसुपर्ण (त्रिसुपर्णमित्य आदि) नामक मन्त्रों का पाठ करता है और 'ब्रह्ममेतु माम्' आदि तैत्तिरीय-प्रसिद्ध विद्याओं के छह अंगों का ज्ञान रखता है, ये सभी शुद्ध हैं। 26॥
Now I will describe the Pankteya Brahmins. Only they should be known as Pantikpure. The one who chants the mantras called Trinachiket, consumes the five fires like Garhapatya, recites the mantras called Trisuparna (Trisuparnamitya etc.) and has the knowledge of the six limbs of the Taittiriya-famous teachings like 'Brahmametu Maam' etc., all these are the pure ones. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥