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mahabharat 13.92.25: यदि ज्ञान और वेद में परास्नातक हुए सभी ब्राह्मण सदाचार में तत्पर रहने वाले हों, तो उन्हें सर्व पवित्र समझना चाहिए ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 13.92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.92.25 
विद्यावेदव्रतस्नाता ब्राह्मणा: सर्व एव हि।
सदाचारपराश्चैव विज्ञेया: सर्वपावना:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
यदि ज्ञान और वेद में परास्नातक हुए सभी ब्राह्मण सदाचार में तत्पर रहने वाले हों, तो उन्हें सर्व पवित्र समझना चाहिए ॥25॥
 
If all the Brahmins who have graduated in knowledge and Vedas are the ones who remain active in good conduct, then they should be considered as all holy. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)