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mahabharat 13.92.24: भरतश्रेष्ठ! अब जिनका वर्णन किया जा रहा है, वे सब पंक्तिपाव कहलाएँ। मैं इनका वर्णन इसलिए करूँगा ताकि आप श्राद्ध में ब्राह्मणों की परीक्षा कर सकें।   |   mahabharat अध्याय 13.92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.92.24 
इमे तु भरतश्रेष्ठ विज्ञेया: पंक्तिपावना:।
ये त्वतस्तान् प्रवक्ष्यामि परीक्षस्वेह तान् द्विजान्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! अब जिनका वर्णन किया जा रहा है, वे सब पंक्तिपाव कहलाएँ। मैं इनका वर्णन इसलिए करूँगा ताकि आप श्राद्ध में ब्राह्मणों की परीक्षा कर सकें।
 
Bharatshrestha! Now those who are being described, all of them should be known as Panktipav. I will describe these so that you can test the Brahmins in Shraddha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)