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mahabharat 13.92.23: जो मूर्ख पंक्ति को अपवित्र करता है, वह उन अनेक ब्राह्मणों के दान के फल से दाता को वंचित कर देता है, जिन्हें वह पंक्ति में भोजन करते देखता है। 23.   |   mahabharat अध्याय 13.92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.92.23 
अपांक्तो यावत: पांक्तान् भुञ्जानाननुपश्यति।
तावत्फलाद् भ्रंशयति दातारं तस्य बालिशम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जो मूर्ख पंक्ति को अपवित्र करता है, वह उन अनेक ब्राह्मणों के दान के फल से दाता को वंचित कर देता है, जिन्हें वह पंक्ति में भोजन करते देखता है। 23.
 
The fool who pollutes the rows deprives the donor of the fruits of the donations of those many Brahmins he sees eating in a row. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)