श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.92.22 
तिलैर्विरहितं श्राद्धं कृतं क्रोधवशेन च।
यातुधाना: पिशाचाश्च विप्रलुम्पन्ति तद्धवि:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जो श्राद्ध तिल रहित होता है अथवा क्रोधपूर्वक किया जाता है, उसकी आहुति यातुधान (राक्षस) और भूतगण नष्ट कर देते हैं ॥ 22॥
 
The Shraddha which is devoid of sesame seeds, or which is performed in anger, its offerings are made to vanish by Yaatudhaan (demons) and ghosts. ॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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