श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.92.21 
श्वानश्च पंक्तिदूषाश्च नावेक्षेरन् कथंचन।
तस्मात् परिसृते दद्यात् तिलांश्चान्ववकीरयेत् ॥ २१॥
 
 
अनुवाद
कुत्तों और अपवित्र ब्राह्मणों की दृष्टि उन पर न पड़े, इसके लिए चारों ओर से घिरे हुए स्थान पर श्राद्ध करना चाहिए और उस स्थान पर तिल छिड़कने चाहिए ॥21॥
 
To ensure that the sight of dogs and polluting Brahmins does not fall on them, one should perform the Shraddha ceremony in a place that is surrounded from all sides and sprinkle sesame seeds all over the place. ॥21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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