Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.92.2: भीष्मजी बोले- राजन! दान-पुण्य के जानकार क्षत्रियों को देव-सम्बन्धी कार्य (यज्ञ-यागादि) में ब्राह्मण की परीक्षा नहीं करनी चाहिए, किन्तु पितरों के कार्य (श्राद्ध) में उनकी परीक्षा करना उचित माना गया है॥2॥ | mahabharat अध्याय 13.92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्मजी बोले- राजन! दान-पुण्य के जानकार क्षत्रियों को देव-सम्बन्धी कार्य (यज्ञ-यागादि) में ब्राह्मण की परीक्षा नहीं करनी चाहिए, किन्तु पितरों के कार्य (श्राद्ध) में उनकी परीक्षा करना उचित माना गया है॥2॥
Bhishmaji said – King! Kshatriyas who are knowledgeable about charity should not test a Brahmin in the work related to God (Yagya-Yagadi), but it is considered justified to test them in the work of ancestors (Shraddha). 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥