Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.92.17: इन नीच ब्राह्मणों को तो वंश से बाहर ही रखना चाहिए। जो मूर्ख ब्राह्मण शूद्रों को वेदों का उपदेश देते हैं, वे भी अपंकतेय (वंश से बाहर) हैं॥17॥ | mahabharat अध्याय 13.92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतानिमान् विजानीयादपांक्तेयान् द्विजाधमान्।
शूद्राणामुपदेशं च ये कुर्वन्त्यल्पचेतस:॥ १७॥
अनुवाद
इन नीच ब्राह्मणों को तो वंश से बाहर ही रखना चाहिए। जो मूर्ख ब्राह्मण शूद्रों को वेदों का उपदेश देते हैं, वे भी अपंकतेय (वंश से बाहर) हैं॥17॥
These lowly Brahmins should be considered worthy of being kept out of the line. The foolish Brahmins who preach the Vedas to Shudras are also Apankteya (out of the line).॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥