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mahabharat 13.92.16: जो मूर्ख मनुष्य ऐसे कुल को दूषित करने वाले ब्राह्मणों को जान-बूझकर भोजन कराते हैं, उनके पितर परलोक में अवश्य ही उनका मल खाते हैं॥16॥   |   mahabharat अध्याय 13.92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.92.16 
ज्ञानपूर्वं तु ये तेभ्य: प्रयच्छन्त्यल्पबुद्धय:।
पुरीषं भुञ्जते तेषां पितर: प्रेत्य निश्चय:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जो मूर्ख मनुष्य ऐसे कुल को दूषित करने वाले ब्राह्मणों को जान-बूझकर भोजन कराते हैं, उनके पितर परलोक में अवश्य ही उनका मल खाते हैं॥16॥
 
Those foolish people who knowingly offer food to such Brahmins who pollute the line, their forefathers certainly eat their feces in the next world.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)