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mahabharat 13.92.1: युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! ब्राह्मण को श्राद्धदान (अर्थात निमंत्रण) किस प्रकार देना चाहिए? कुरुश्रेष्ठ! कृपया मुझे स्पष्ट रूप से बताइए। 1॥   |   mahabharat अध्याय 13.92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 92: श्राद्धमें ब्राह्मणोंकी परीक्षा, पंक्तिदूषक और पंक्तिपावन ब्राह्मणोंका वर्णन, श्राद्धमें लाख मूर्ख ब्राह्मणोंको भोजन करानेकी अपेक्षा एक वेदवेत्ताको भोजन करानेकी श्रेष्ठताका कथन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.92.1 
युधिष्ठिर उवाच
कीदृशेभ्य: प्रदातव्यं भवेच्छ्राद्धं पितामह।
द्विजेभ्य: कुरुशार्दूल तन्मे व्याख्यातुमर्हसि॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! ब्राह्मण को श्राद्धदान (अर्थात निमंत्रण) किस प्रकार देना चाहिए? कुरुश्रेष्ठ! कृपया मुझे स्पष्ट रूप से बताइए। 1॥
 
Yudhishthir asked – Grandfather! How should one give Shraddha donation (i.e. invitation) to a Brahmin? Kurushrestha! Please describe it clearly for me. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)