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mahabharat 13.91.9: हे कुरुकुलश्रेष्ठ! जो मनुष्य ज्येष्ठा नक्षत्र में इन्द्रियों का संयम करके पिण्डदान करता है, वह ऐश्वर्यशाली होता है और प्रभुत्व प्राप्त करता है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.91: विभिन्न नक्षत्रोंमें श्राद्ध करनेका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 91: विभिन्न नक्षत्रोंमें श्राद्ध करनेका फल  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.91.9 
आधिपत्यं व्रजेन्मर्त्यो ज्येष्ठायामपवर्जयन्।
नर: कुरुकुलश्रेष्ठ ऋद्धो दमपुर:सर:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुकुलश्रेष्ठ! जो मनुष्य ज्येष्ठा नक्षत्र में इन्द्रियों का संयम करके पिण्डदान करता है, वह ऐश्वर्यशाली होता है और प्रभुत्व प्राप्त करता है॥9॥
 
Kurukula's best! A person who performs Pind Daan in Jyestha Nakshatra with restraint of senses becomes prosperous and attains dominance. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)