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mahabharat 13.91.7: चित्र में श्राद्ध दान करने वाले मनुष्य को सुन्दर पुत्र प्राप्त होते हैं। स्वाति योग में पितरों का पूजन करने वाला वाणिज्य द्वारा जीविका चलाता है। 7॥   |   mahabharat अध्याय 13.91: विभिन्न नक्षत्रोंमें श्राद्ध करनेका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 91: विभिन्न नक्षत्रोंमें श्राद्ध करनेका फल  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.91.7 
चित्रायां तु ददच्छ्राद्धं लभेद् रूपवत: सुतान्।
स्वातियोगे पितॄनर्च्य वाणिज्यमुपजीवति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
चित्र में श्राद्ध दान करने वाले मनुष्य को सुन्दर पुत्र प्राप्त होते हैं। स्वाति योग में पितरों का पूजन करने वाला वाणिज्य द्वारा जीविका चलाता है। 7॥
 
In the picture, a man who donates Shraddha gets handsome sons. In the yoga of Swati, the one who worships his ancestors earns his living through commerce. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)