श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 91: विभिन्न नक्षत्रोंमें श्राद्ध करनेका फल  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.91.15 
इमं श्राद्धविधिं श्रुत्वा शशबिन्दुस्तथाकरोत्।
अक्लेशेनाजयच्चापि महीं सोऽनुशशास ह॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस श्राद्धकर्म को सुनकर राजा शशबिन्दु ने वैसा ही किया और बिना किसी कष्ट के पृथ्वी को जीत लिया तथा उसका शासन अपने हाथ में ले लिया॥15॥
 
After listening to this ritual of Shraddha, King Shashabindu did the same. He conquered the earth without any pain and took its rule in his hands.॥ 15॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि श्राद्धकल्पे एकोननवतितमोऽध्याय:॥ ८९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें श्राद्धकल्पविषयक नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८९॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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