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श्लोक 13.91.14  |
बहुकुप्यकृतं वित्तं विन्दते रेवतीं श्रित:।
अश्विनीष्वश्वान् विन्देत भरणीष्वायुरुत्तमम्॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य श्राद्ध में रेवती का आश्रय लेता है (अर्थात् रेवती में श्राद्ध करता है) उसे स्वर्ण-रजत के अतिरिक्त अनेक प्रकार की सम्पत्तियाँ प्राप्त होती हैं। अश्विनी में घोड़ों का श्राद्ध करने से तथा भरणी में श्राद्ध करने से उत्तम आयु प्राप्त होती है। 14॥ |
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| A man who takes shelter of Revati in Shraddha (i.e. performs Shraddha in Revati) gets various types of wealth apart from gold and silver. By performing Shraddha for horses in Ashwini and performing Shraddha in Bharani, one attains good age. 14॥ |
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