श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 91: विभिन्न नक्षत्रोंमें श्राद्ध करनेका फल  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.91.10 
मूले त्वारोग्यमृच्छेत यशोऽऽषाढासु चोत्तमम्।
उत्तरासु त्वषाढासु वीतशोकश्चरेन्महीम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मूलाषाढ़ा में श्राद्ध करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और पूर्वाषाढ़ा में यश की प्राप्ति होती है। उत्तराषाढ़ा में पितृयज्ञ करने वाला मनुष्य शोकरहित होकर पृथ्वी पर विचरण करता है। 10॥
 
By performing Shraddha in Moola, one attains health and in Purvashadha one attains good fame. A person who performs Pitriyagya in Uttarashadha wanders on earth without sorrow. 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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