श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 90: श्राद्धमें पितरोंके तृप्तिविषयका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.90.7 
अपि न: स्वकुले जायाद् यो नो दद्यात्त्रयोदशीम्।
मघासु सर्पि:संयुक्तं पायसं दक्षिणायने॥ ७॥
 
 
अनुवाद
पितर कहते हैं, 'क्या हमारे कुल में कोई ऐसा पुरुष उत्पन्न होगा जो दक्षिणायन में आश्विन मास के कृष्णपक्ष की माघ और त्रयोदशी तिथि के संयोग में हमारे लिए घी मिश्रित खीर का दान करेगा?॥ 7॥
 
The ancestors say, 'Will there be a man born in our clan who will make a donation of kheer mixed with ghee for us on the conjunction of Magha and Trayodashi Tithi in the dark fortnight of the month of Ashwin during Dakshinayana?॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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