| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 90: श्राद्धमें पितरोंके तृप्तिविषयका वर्णन » श्लोक 10 |
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| | | | श्लोक 13.90.10  | आपो मूलं फलं मांसमन्नं वापि पितृक्षये।
यत् किंचिन्मधुसम्मिश्रं तदानन्त्याय कल्पते॥ १०॥ | | | | | | अनुवाद | | जल, मूल, फल, उनका गूदा और भोजन आदि जो कुछ भी शहद में मिलाकर पितरों को उनकी मृत्युतिथि पर अर्पित किया जाता है, वह उन्हें चिरकाल तक तृप्त करता है।॥10॥ | | | | Water, roots, fruits, their pulp and food etc. whatever is offered mixed with honey to the ancestors on their death anniversary will satisfy them for eternity.'॥ 10॥ | | | इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि श्राद्धकल्पेऽष्टाशीतितमोऽध्याय:॥ ८८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें श्राद्धकल्पविषयक अट्ठासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८८॥
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