श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 90: श्राद्धमें पितरोंके तृप्तिविषयका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.90.1 
युधिष्ठिर उवाच
किंस्विद् दत्तं पितृभ्यो वै भवत्यक्षयमीश्वर।
किं हविश्चिररात्राय किमानन्त्याय कल्पते॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! पितरों को दी गई कौन सी वस्तु चिरस्थायी होती है? कौन सी वस्तु पितरों को दीर्घकाल तक संतुष्ट रखती है और कौन सी वस्तु पितरों को चिरकाल तक संतुष्ट रखती है?"
 
Yudhishthira asked, "Grandfather! Which thing given to ancestors is everlasting? Which thing keeps ancestors satisfied for a longer period of time and which thing keeps ancestors satisfied for eternity?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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