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mahabharat 13.9.3: भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! जो कोई कुछ देने की प्रतिज्ञा करता है, चाहे वह थोड़ा हो या अधिक, परन्तु देता नहीं, उसकी सारी आशाएँ उसी प्रकार नष्ट हो जाती हैं, जैसे कि नपुंसक की संतान प्राप्ति के फल की आशा नष्ट हो जाती है।"   |   mahabharat अध्याय 13.9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.9.3 
भीष्म उवाच
यो न दद्यात् प्रतिश्रुत्य स्वल्पं वा यदि वा बहु।
आशास्तस्य हता: सर्वा: क्लीबस्येव प्रजाफलम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! जो कोई कुछ देने की प्रतिज्ञा करता है, चाहे वह थोड़ा हो या अधिक, परन्तु देता नहीं, उसकी सारी आशाएँ उसी प्रकार नष्ट हो जाती हैं, जैसे कि नपुंसक की संतान प्राप्ति के फल की आशा नष्ट हो जाती है।"
 
Bhishma said, "Yudhishthira! Whoever promises to give something, whether little or more, but does not give it, all his hopes are destroyed just like the hope of a eunuch for the fruit of having a child."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)