श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.9.26 
ब्राह्मणस्य हि दत्तेन ध्रुवं स्वर्गो ह्यनुत्तम:।
शक्य: प्राप्तुं विशेषेण दानं हि महती क्रिया॥ २६॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों को दान देने से मनुष्य निश्चय ही परम स्वर्ग को प्राप्त होता है, क्योंकि दान देना महान पुण्य कर्म है॥26॥
 
By giving alms to Brahmins one can certainly attain the supreme heaven, especially because almsgiving is a great pious act.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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