श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.9.24 
एतद्धि परमं तेजो ब्राह्मणस्येह दृश्यते।
सहस्रकिरणस्येव सवितुर्धरणीतले॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इस पृथ्वी पर ब्राह्मण का उत्तम तेज हजारों किरणों वाले सूर्यदेव के समान दिखाई देता है।
 
On this earth, the excellent brilliance of a Brahmin is visible like the Sun God having a thousand rays. 24.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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