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mahabharat 13.9.23: तथा दानकर्ता के पुत्र-पौत्रों, सम्बन्धियों, पशुओं, मन्त्रियों, नगर और प्रदेश के लिए शान्ति का स्रोत बनकर, उन्हें उनके कल्याण में भागी बनाता है और उन सबका पालन-पोषण करता है। 23.   |   mahabharat अध्याय 13.9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.9.23 
पुत्रान् पौत्रान् पशूंश्चैव बान्धवान् सचिवांस्तथा।
पुरं जनपदं चैव शान्तिरिष्टेन पोषयेत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तथा दानकर्ता के पुत्र-पौत्रों, सम्बन्धियों, पशुओं, मन्त्रियों, नगर और प्रदेश के लिए शान्ति का स्रोत बनकर, उन्हें उनके कल्याण में भागी बनाता है और उन सबका पालन-पोषण करता है। 23.
 
And becoming a source of peace for the donor's sons and grandsons, relatives, animals, ministers, city and region, he makes them share in their welfare and nourishes them all. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)