Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.9.20: पृथ्वीनाथ! यदि आप पहले किसी ब्राह्मण को आशा दे दें, तो वह समिधा से प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.9.20 
ब्राह्मणो ह्याशया पूर्वं कृतया पृथिवीपते।
सुसमिद्धो यथा दीप्त: पावकस्तद्विध: स्मृत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! यदि आप पहले किसी ब्राह्मण को आशा दे दें, तो वह समिधा से प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी हो जाता है।
 
Prithvinath! If you first give hope to a Brahmin, he becomes as radiant as the fire ignited by samidha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)