श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.9.19 
एवमेव च मां नित्यं ब्राह्मणा: संदिशन्ति वै।
प्रतिश्रुत्य भवेद् देयं नाशा कार्या द्विजोत्तमे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण भी मुझे सदैव यही उपदेश देते थे कि प्रतिज्ञा करके वस्तु ब्राह्मण को ही दे देनी चाहिए। श्रेष्ठ ब्राह्मण की आशा नहीं तोड़नी चाहिए॥19॥
 
Even the Brahmins always used to advise me that after making a promise, the thing should be given to a Brahmin. The hope of a great Brahmin should not be broken.॥ 19॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd