Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.9.15: बंदर बोला - मैं सदैव ब्राह्मणों के फल चुराकर खाता था। इसी पाप के कारण मैं बंदर बना हूँ। इसलिए बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि ब्राह्मणों का धन कभी न चुराए। उनसे कभी झगड़ा न करे और जो कुछ भी उन्हें देने का वचन दिया हो, उसे अवश्य लौटा दे॥ 15॥ | mahabharat अध्याय 13.9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वानर उवाच
सदा चाहं फलाहारो ब्राह्मणानां प्लवङ्गम:।
तस्मान्न ब्राह्मणस्वं तु हर्तव्यं विदुषा सदा।
समं विवादो मोक्तव्यो दातव्यं स प्रतिश्रुतम्॥ १५॥
अनुवाद
बंदर बोला - मैं सदैव ब्राह्मणों के फल चुराकर खाता था। इसी पाप के कारण मैं बंदर बना हूँ। इसलिए बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि ब्राह्मणों का धन कभी न चुराए। उनसे कभी झगड़ा न करे और जो कुछ भी उन्हें देने का वचन दिया हो, उसे अवश्य लौटा दे॥ 15॥
The monkey said - I always used to steal the fruits of Brahmins and eat them. Due to this sin I became a monkey. Therefore, a wise man should never steal the wealth of a Brahmin. He should never quarrel with them and whatever has been promised to them, he should definitely give it back.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥