श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.9.14 
भीष्म उवाच
शृगालो वानरं प्राह पुनरेव नरोत्तम।
किं त्वया पातकं कर्म कृतं येनासि वानर:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे पुरुषश्रेष्ठ! इसके बाद सियार ने पुनः वानर से पूछा - 'तुमने ऐसा कौन-सा पाप किया था, जिससे तुम वानर बने?'॥14॥
 
Bhishma says - O best of men! After this the jackal again asked the monkey - 'What sin did you commit that made you a monkey?'॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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