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mahabharat 13.9.1-2: युधिष्ठिर ने पूछा - हे धर्मात्माओं में श्रेष्ठ पितामह! जो ब्राह्मणों को देने की प्रतिज्ञा करके फिर आसक्ति के कारण नहीं देते, वे कौन हैं? जो देने का संकल्प करके भी नहीं देते, वे दुष्टात्मा कौन हैं? इस धर्म की बात को यथार्थ रूप में मुझसे कहिए। ॥1-2॥   |   mahabharat अध्याय 13.9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 9: ब्राह्मणको देनेकी प्रतिज्ञा करके न देने तथा उसके धनका अपहरण करनेसे दोषकी प्राप्तिके विषयमें सियार और वानरके संवादका उल्लेख एवं ब्राह्मणोंको दान देनेकी महिमा  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  13.9.1-2 
युधिष्ठिर उवाच
ब्राह्मणानां तु ये लोका: प्रतिश्रुत्य पितामह।
न प्रयच्छन्ति मोहात् ते के भवन्ति महाद्युते॥ १॥
एतन्मे तत्त्वतो ब्रूहि धर्मं धर्मभृतां वर।
प्रतिश्रुत्य दुरात्मानो न प्रयच्छन्ति ये नरा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - हे धर्मात्माओं में श्रेष्ठ पितामह! जो ब्राह्मणों को देने की प्रतिज्ञा करके फिर आसक्ति के कारण नहीं देते, वे कौन हैं? जो देने का संकल्प करके भी नहीं देते, वे दुष्टात्मा कौन हैं? इस धर्म की बात को यथार्थ रूप में मुझसे कहिए। ॥1-2॥
 
Yudhishthira asked, "O great and illustrious grandfather, the best among the righteous! What are those who promise to give something to the Brahmins and then do not give it due to attachment? What are those wicked souls who resolve to give something but do not give it? Tell me this matter of righteousness in its true form. ॥1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)