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mahabharat 13.89.14: महाराज! जो मनुष्य एकादशी को श्राद्ध करता है, उसे सोना-चाँदी के अतिरिक्त सब प्रकार की सम्पत्ति प्राप्त होती है। उसके घर में ब्राह्मण तेज से युक्त पुत्र उत्पन्न होता है ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 13.89: विविध तिथियोंमें श्राद्ध करनेका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 89: विविध तिथियोंमें श्राद्ध करनेका फल  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.89.14 
कुप्यभागी भवेन्मर्त्य: कुर्वन्नेकादशीं नृप।
ब्रह्मवर्चस्विन: पुत्रा जायन्ते तस्य वेश्मनि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जो मनुष्य एकादशी को श्राद्ध करता है, उसे सोना-चाँदी के अतिरिक्त सब प्रकार की सम्पत्ति प्राप्त होती है। उसके घर में ब्राह्मण तेज से युक्त पुत्र उत्पन्न होता है ॥14॥
 
Maharaj! A person who performs Shraddha on Ekadasi gets all kinds of wealth except gold and silver. A son endowed with Brahmanical brilliance is born in his house. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)