Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.89.1: युधिष्ठिर बोले - हे धर्मात्मान! पृथ्वीनाथ! जिस प्रकार आपने चारों वर्णों के लिए धर्म का वर्णन किया है, उसी प्रकार मेरे लिए श्राद्ध की विधि का वर्णन कीजिए॥1॥   |   mahabharat अध्याय 13.89: विविध तिथियोंमें श्राद्ध करनेका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 89: विविध तिथियोंमें श्राद्ध करनेका फल  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.89.1 
युधिष्ठिर उवाच
चातुर्वर्ण्यस्य धर्मात्मन् धर्मा: प्रोक्ता यथा त्वया।
तथैव मे श्राद्धविधिं कृत्स्नं प्रब्रूहि पार्थिव॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे धर्मात्मान! पृथ्वीनाथ! जिस प्रकार आपने चारों वर्णों के लिए धर्म का वर्णन किया है, उसी प्रकार मेरे लिए श्राद्ध की विधि का वर्णन कीजिए॥1॥
 
Yudhishthira said - O Dharmatman! Prithvinath! Just as you have explained the Dharma for the four Varnas, in the same way please describe the method of Shraddha for me.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)