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mahabharat 13.88.9: जब वह महान बालक गर्भ में बढ़ने लगा, तब उसका तेज सम्पूर्ण शरीर में व्याप्त होने के कारण कृत्तिकाओं को कहीं भी शांति नहीं मिली॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.88.9 
ततस्ता वर्धमानस्य कुमारस्य महात्मन:।
तेजसाभिपरीताङ्गॺो न क्वचिच्छर्म लेभिरे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जब वह महान बालक गर्भ में बढ़ने लगा, तब उसका तेज सम्पूर्ण शरीर में व्याप्त होने के कारण कृत्तिकाओं को कहीं भी शांति नहीं मिली॥9॥
 
When that great child started growing in the womb, the Krittikas could not find peace anywhere due to his radiance permeating their whole body.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)