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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.88.8 
तास्तु षट् कृत्तिका गर्भं पुपुषुर्जातवेदस:।
षट्सु वर्त्मसु तेजोऽग्ने: सकलं निहितं प्रभो॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! उन छह कृत्तिकाओं ने अग्नि के उस गर्भ का पोषण किया। अग्नि का वह सारा तेज छह नाड़ियों द्वारा उनके भीतर स्थापित हो गया।
 
O Lord! Those six Krittikas nourished that womb of Agni. All that brilliance of Agni was established within them through six channels. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)