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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.88.7 
षण्णां तासां तत: प्रीत: पावको गर्भधारणात्।
स्वेन तेजोविसर्गेण वीर्येण परमेण च॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अग्निदेव उन छहों कृतिकाओं पर बहुत प्रसन्न हुए, क्योंकि उनके तेज की स्थापना हुई थी और उत्तम वीर्य प्राप्त करके उन्होंने गर्भधारण किया था।
 
Agnidev was very pleased with those six Krittikas because of the establishment of his radiance and because they had conceived by receiving the excellent semen. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)