Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.88.6: इसका कारण यह था कि दिव्य अप्सराओं में कोई भी अन्य स्त्री अग्नि और रुद्र के तेज को सहन करने में सक्षम नहीं थी और ये कृतिकाएं अपनी शक्तियों से गर्भ को अच्छी तरह से धारण और पोषित कर सकती थीं। | mahabharat अध्याय 13.88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न देवतानां काचिद्धि समर्था जातवेदस:।
एता हि शक्तास्तं गर्भं संधारयितुमोजसा॥ ६॥
अनुवाद
इसका कारण यह था कि दिव्य अप्सराओं में कोई भी अन्य स्त्री अग्नि और रुद्र के तेज को सहन करने में सक्षम नहीं थी और ये कृतिकाएं अपनी शक्तियों से गर्भ को अच्छी तरह से धारण और पोषित कर सकती थीं।
The reason was that no other woman amongst the celestial nymphs was capable of sustaining the brilliance of Agni and Rudra and these Krittikas could carry and nourish the foetus well with their powers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥