Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.88.35: परशुरामजी स्वर्णदान करके सब पापों से मुक्त हो गए और स्वर्ग में उस महान् स्थान को प्राप्त किया जो अन्य मनुष्यों के लिए अत्यंत दुर्लभ है ॥35॥ | mahabharat अध्याय 13.88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परशुरामजी स्वर्णदान करके सब पापों से मुक्त हो गए और स्वर्ग में उस महान् स्थान को प्राप्त किया जो अन्य मनुष्यों के लिए अत्यंत दुर्लभ है ॥35॥
Parashuramji became free from all sins by donating gold and attained that great place in heaven which is very rare for other humans. 35॥
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि तारकवधोपाख्यानं नाम षडशीतितमोऽध्याय:॥ ८६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें तारकवधका उपाख्याननामक छियासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥