Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.88.34: कुरुनन्दन! नरेश्वर! इस प्रकार प्राचीन काल में वशिष्ठजी ने परशुरामजी को यह सम्पूर्ण घटना तथा सुवर्ण की उत्पत्ति और माहात्म्य सुनाया था। अतः तुम्हें सुवर्ण दान करने का प्रयत्न करना चाहिए। 34॥ | mahabharat अध्याय 13.88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं रामाय कौरव्य वसिष्ठोऽकथयत् पुरा।
तस्मात् सुवर्णदानाय प्रयतस्व नराधिप॥ ३४॥
अनुवाद
कुरुनन्दन! नरेश्वर! इस प्रकार प्राचीन काल में वशिष्ठजी ने परशुरामजी को यह सम्पूर्ण घटना तथा सुवर्ण की उत्पत्ति और माहात्म्य सुनाया था। अतः तुम्हें सुवर्ण दान करने का प्रयत्न करना चाहिए। 34॥
Kurunandan! Nareshwar! Thus, in ancient times, Vashishthaji had narrated this entire incident and the origin and greatness of gold to Parshuram. Therefore, you should try to donate gold. 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥