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mahabharat 13.88.33: कार्तिकेय के साथ ही स्वर्ण उत्पन्न हुआ था और अग्नि का सर्वश्रेष्ठ तेज माना गया है, अतः वह शुभ, अक्षय और उत्तम रत्न है॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 13.88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.88.33 
तस्मात् सुवर्णं मंगल्यं रत्नमक्षय्यमुत्तमम्।
सहजं कार्तिकेयस्य वह्नेस्तेज: परं मतम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
कार्तिकेय के साथ ही स्वर्ण उत्पन्न हुआ था और अग्नि का सर्वश्रेष्ठ तेज माना गया है, अतः वह शुभ, अक्षय और उत्तम रत्न है॥ 33॥
 
Gold was born along with Kartikeya and is considered to be the best brilliance of Agni. Hence it is auspicious, inexhaustible and an excellent gem.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)