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श्लोक  13.88.3 
उक्तं स देवतानां हि अवध्य इति पार्थिव।
कथं तस्याभवन्मृत्युर्विस्तरेण प्रकीर्तय॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! आपने पहले कहा था कि वह देवताओं के लिए अजेय था, फिर उसकी मृत्यु कैसे हुई? कृपया मुझे विस्तार से बताइए॥3॥
 
Prithvinath! You have said earlier that he was invincible for the gods, then how did he die? Please tell me in detail. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)