Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.88.12: वह तेजस्वी बालक अग्नि के समान चमक रहा था। उसके शरीर की आकृति दिव्य थी। वह देखने में अत्यंत सुन्दर लग रहा था। वह दिव्य सरकण्डों के वन में उत्पन्न हुआ और दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा।॥12॥ | mahabharat अध्याय 13.88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह तेजस्वी बालक अग्नि के समान चमक रहा था। उसके शरीर की आकृति दिव्य थी। वह देखने में अत्यंत सुन्दर लग रहा था। वह दिव्य सरकण्डों के वन में उत्पन्न हुआ और दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा।॥12॥
That radiant child was shining like fire. The shape of his body was divine. He appeared very lovely to look at. He was born in a forest of divine reeds and started growing day by day.॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥