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mahabharat 13.88.11: जब छहों लोकों में पला हुआ गर्भ उत्पन्न होकर एक हो गया, तब सोने के पास स्थित पृथ्वी ने उस बालक को ग्रहण कर लिया ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 13.88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.88.11 
ततस्तं षडधिष्ठानं गर्भमेकत्वमागतम्।
पृथिवी प्रतिजग्राह कार्तस्वरसमीपत:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब छहों लोकों में पला हुआ गर्भ उत्पन्न होकर एक हो गया, तब सोने के पास स्थित पृथ्वी ने उस बालक को ग्रहण कर लिया ॥11॥
 
When the foetus, nurtured in the six abodes, was born and became one, then the Earth, situated near the gold, accepted the child. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)