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mahabharat 13.88.10: नरश्रेष्ठ! तत्पश्चात् तेज से युक्त अंगों वाली वे समस्त कृत्तिकाएँ प्रसव के समय उपस्थित होकर एक साथ ही उस गर्भ को जन्म देने लगीं ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 13.88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 88: कार्तिकेयकी उत्पत्ति, पालन-पोषण और उनका देवसेनापति-पदपर अभिषेक, उनके द्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.88.10 
ततस्तेज:परीताङ्गॺ: सर्वा: काल उपस्थिते।
समं गर्भं सुषुविरे कृत्तिकास्तं नरर्षभ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
नरश्रेष्ठ! तत्पश्चात् तेज से युक्त अंगों वाली वे समस्त कृत्तिकाएँ प्रसव के समय उपस्थित होकर एक साथ ही उस गर्भ को जन्म देने लगीं ॥10॥
 
Narashrestha! Thereafter, all those Krittikas with organs filled with radiance, being present at the time of delivery, simultaneously gave birth to that womb. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)