Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.87.8: ब्रह्माजी ने कहा - हे देवश्रेष्ठ! उस शाप के समय अग्निदेव वहाँ उपस्थित नहीं थे। अतः वे ही देवताओं के द्रोहियों का वध करने के लिए संतान उत्पन्न करेंगे। | mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मोवाच
हुताशनो न तत्रासीच्छापकाले सुरोत्तमा:।
स उत्पादयितापत्यं वधाय त्रिदशद्विषाम्॥ ८॥
अनुवाद
ब्रह्माजी ने कहा - हे देवश्रेष्ठ! उस शाप के समय अग्निदेव वहाँ उपस्थित नहीं थे। अतः वे ही देवताओं के द्रोहियों का वध करने के लिए संतान उत्पन्न करेंगे।
Brahmaji said - O best of the gods! At the time of that curse, Agnidev was not present there. Therefore, he alone will produce offspring to kill the traitors of the gods. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥