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mahabharat 13.87.75-76h: वह बालक अपने तेज से सभी सजीव-निर्जीव प्राणियों को प्रकाशित करता हुआ पर्वतों, नदियों और झरनों की ओर दौड़ने लगा।   |   mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध  »  श्लोक 75-76h
 
 
श्लोक  13.87.75-76h 
पर्यधावत शैलांश्च नदी: प्रस्रवणानि च॥ ७५॥
व्यादीपयंस्तेजसा च त्रैलोक्यं सचराचरम्।
 
 
अनुवाद
वह बालक अपने तेज से सभी सजीव-निर्जीव प्राणियों को प्रकाशित करता हुआ पर्वतों, नदियों और झरनों की ओर दौड़ने लगा।
 
That child started running towards the mountains, rivers and waterfalls, illuminating all living and non-living creatures with his brilliance. 75 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)