Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.87.73: हे तपस्वियों में श्रेष्ठ अग्निदेव! उनका शरीर कमल और उत्पल से भरे हुए सरोवरों के समान शीतल है और कदम्ब के पुष्पों के समान मधुर सुगन्धि उत्सर्जित करता रहता है ॥ 73॥ | mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे तपस्वियों में श्रेष्ठ अग्निदेव! उनका शरीर कमल और उत्पल से भरे हुए सरोवरों के समान शीतल है और कदम्ब के पुष्पों के समान मधुर सुगन्धि उत्सर्जित करता रहता है ॥ 73॥
Agnidev, the best amongst ascetics! His body is as cool as the lakes filled with lotus and utpala and like the kadamba flowers, he keeps on emitting a sweet fragrance. ॥ 73॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥