Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.87.45-46: भार्गव! अग्नि को बाहर निकालने का एकमात्र उपाय मनुष्यों ने शमी का मंथन ही खोजा है। अग्नि ने रसातल में जिस जल का स्पर्श किया था और जो वहाँ सोये हुए अग्निदेव के तेज से संतृप्त हो गया था, वही जल पर्वतीय झरनों के रूप में अपनी ऊष्मा छोड़ता है। | mahabharat अध्याय 13.87: ब्रह्माजीका देवताओंको आश्वासन, अग्निकी खोज, अग्निके द्वारा स्थापित किये हुए शिवके तेजसे संतप्त हो गंगाका उसे मेरुपर्वतपर छोड़ना, कार्तिकेय और सुवर्णकी उत्पत्ति, वरुणरूपधारी महादेवजीके यज्ञमें अग्निसे ही प्रजापतियों और सुवर्णका प्रादुर्भाव, कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भार्गव! अग्नि को बाहर निकालने का एकमात्र उपाय मनुष्यों ने शमी का मंथन ही खोजा है। अग्नि ने रसातल में जिस जल का स्पर्श किया था और जो वहाँ सोये हुए अग्निदेव के तेज से संतृप्त हो गया था, वही जल पर्वतीय झरनों के रूप में अपनी ऊष्मा छोड़ता है।
Bhaargava! The only way men have found to bring out Agni is by churning the Shami. The water which Agni had touched in the abyss and which had become saturated with the brilliance of the Agnidev who was sleeping there, that water releases its heat in the form of mountain springs. 45-46.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥